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KabirPrakatDiwasNotJayanti Parmeshwar Kabir Sahib Ji appeared on a lotus flower as an infant in Kashi 600 years ago and went from Maghar in the presence of thousands of people with his to Satlok. Flowers were found in the place of the body, the evidence of which exists in Maghar. Therefore, the manifest day of Kabir Sahib is celebrated, not the birth anniversary.

मानव उत्थान

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जब तक आध्यात्मिक ज्ञान नहीं, तब तक तो जीव माया के नशे में अपनाउद्देश्य भूल चुका था और जैसा शराबी नशे में ज्येष्ठ महीनेकी गर्मी में दिन के दोपहर के समय धूप में पड़ा-पड़ा पसीने व रेत में सना भी कह रहा होता है कि मौज हो रही है। परंतु नशा उतरने के पश्चात् उसे पता चलताहै कि तू तो जंगल में पड़ा है, घर तो अभी दूर है।कबीर जी ने कहा है कि :-कबीर, यह माया अटपटी, सब घट आन अड़ी।किस-किस को समझाऊँ, या कूएै भांग पड़ी।।अध्यात्म ज्ञान रूपी औषधि सेवन करने से जीव का नशा उतर जाता है।फिर वह भक्ति के सफर पर चलता है क्योंकि उसे परमात्मा के पास पहुँचना है जोउसका अपना पिता है तथा वह सतलोक जीव का अपना घर है।यात्रा पर चलने वाला व्यक्ति सारे सामान को उठाकर नहीं चल सकता।केवल आवश्यक सामान लेकर यात्रा पर चलता है। इसी प्रकार भक्ति के सफर मेंअपने को हल्का होकर चलना होगा। तभी मंजिल को प्राप्त कर सकेंगे। भक्ति रूपीराह पर चलने के लिए अपने को मानसिक शांति का होना अनिवार्य है। मानसिकपरेशानी का कारण है अपनी परंपराऐं तथा नशा, मान-बड़ाई, लोग-दिखावा, यहभार व्यर्थ के लिए खड़े हैं जैसे बड़ी कोठी-बडी़ मंहगी कार, श्रृंगार करना, म...

Effects of bad educations

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Education System The term education system generally refers to public schooling, not private schooling, and more commonly to kindergarten through high school programs. Schools or school districts are typically the smallest recognized form of “education system” and countries are the largest.

कौन हैं सच्चा भगवान।

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हम सभी धर्मों में सुनते आ रहे हैं की कुल का मालिक एक हैं, वास्तव में सबका मालिक एक ही हैं। पर अब सवाल यह उठता हैं कि आखिर वह सबका भगवान, कुल मालिक , सच्चा भगवान हैं कौन? वेद प्रमाणित करतें हैं की परमात्मा शसरीर हैं, मनुष्य सदर्श हैं, परमात्मा का नाम (कविर्देव) हैं सतलोक में रहता हैं, वहां से गति करके आता हैं, कमल के फूल पर शिशु रूप धारण करके विरजमान होते हैं। और परमात्मा की परवरिश कंवारी गायो से होती हैं। तथा बड़े होकर एक कवि का आचरण करतें हैं और तत्वज्ञान लोकोक्तियों से तथा कविताओं के माध्यम से सुनाते हैं।  उस समय लोग परमात्मा को न पहचान कर एक कवि के रूप में मानते हैं। पवित्रा शास्त्रा भी कविर्देव (कबीर परमेश्वर) के साक्षी   इसी प्रकार कविर्देव (कबीर परमेश्वर) ने मुस्लमानों को बुरा नहीं कहा है, न ही पवित्र कुरान शरीफ को गलत कहा है, केवल उन काजी व मुल्लाओं को लताड़ा है जो सर्वसमाज को कुरान शरीफ के वास्तविक ज्ञान के विपरीत मनमानी साधना करवा रहे हैं। जैसे पवित्रा वेदों के बोलने वाला ब्रह्म कह रहा है कि पूर्ण परमात्मा कविर्देव के विषय में कोई जन्म लेकर अवतार रूप में...

Cancer free treatment

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Lord Kabir   Increases the lifespan of your legitimate / true friend   (True devotee)   - Samaveda Sankhya No.  822 True worship of the true God can only provide protection.   Today millions of people are suffering from cancer.  Either they do not get treatment at all or the treatment is very expensive.  But, just by taking initiation  (Name initiation) from  Sant Rampal Ji Maharaj is doing fine. free If you or a relative of yours is suffering from this deadly disease, please start watching "Sadhana" on TV from 7:30 pm  To learn more, get free  The book "Gyan Ganga".  Send  Give us your contact number,  name and address  Our whatsapp number 7496801825

केंसर तथा अन्य लाईलाज बीमारियों का मुफ्त ईलाज

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पूर्ण परमात्मा की भगती पूर्ण गुरु से नाम लेकर करने से परमात्मा सर्वे रोगों को जड़ से समाप्त कर सौ वर्ष की आयु प्रदान करता हैं। ऋग्वेद मंडल 10 सूक्त 161 मंत्र 2 में प्रमाण है कि परमात्मा अपने भक्तों के संकट निवारण करता है। यदि मृत्यु भी आ जाए तो भी उसको टालकर अपने भक्त को जीवित करके सौ वर्ष जीवन प्रदान कर देता है। पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब ने लाखों लोगों के बीच में एक मरे हुए लड़के को जिंदा कर दिया था। लोगों ने कहा कबीर जी ने कमाल कर दिया। इसलिए कबीर साहेब ने उस लड़के का नाम कमाल रख दिया था। सुख के सागर कबीर प्रभु समर्थ कबीर परमेश्वर ही आयु बढ़ा सकते हैं। सम्मन के पुत्र सेउ का कटा शीश फिर से धड़ पर लगाकर उसकी आयु बढ़ाई थी। संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेकर अपना कल्याण कराएं। परमात्मा की वाणी है: कबीर, जबही सत्यनाम हृदय धरयो, भयो पाप को नास। मानौं चिनगी अग्नि की, परी पुराने घास।। सतनाम का जाप करने से हमारे सभी प्रारब्ध के पाप कर्म कट जाते हैं। सर्वशक्तिमान परमात्मा कबीर साहेब हैं ...
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‘‘सुखदेव की उत्पत्ति की कथा’’  सरलार्थ :- जिस समय भगवान शिव जी ने पार्वती जी को अमर मंत्रा दिया। उस समयएक स्थान पर सूखा वृक्ष था। उसके नीचे आसन लगाया। कारण यह था कि इस अमर नाम को कोई अन्य जीव सुन ले और वह भी अमर हो जाए और बुरे स्वभाव का जीव यदिआध्यात्मिक शक्ति सम्पन्न हो जाएगा तो वह उसका दुरूपयोग करके भले व्यक्तियों कोसताएगा। इसलिए सब गुरूजन एकान्त स्थान पर केवल उपदेश देने योग्य हुए व्यक्तियोंको ही बैठाकर नाम देते हैं। भगवान शंकर जी ने अपने हाथों से ताली बजाई जिसका भयंकरनाद (शोर-आवाज) हुआ। आसपास के पशु तथा पक्षी डरकर दूर चले गए। सूखा वृक्षइसलिए चुना था कि कोई पक्षी आएगा तो तुरंत दिखाई देगा। उस वृक्ष की खोखर (वृक्षके थोथे तने) में मादा तोते ने अण्डे पैदा कर रखे थे। एक अण्डा अस्वस्थ था, अन्य स्वस्थथे। वे शंकर जी की ताली (हाथों से की आवाज) से ही पक्षी बनकर उड़ गए। वह खराब(गन्दा हुआ) अण्डा रह गया। जिस जीव को वह अण्डा प्राप्त हुआ था, वह उस अण्डे में बैठाथा। उसके परिपक्व होने तथा स्वयं को शरीर प्राप्त करने का इंतजार कर रहा था।जैसे बच्चा गर्भ में आने से ही माता-पिता उसे अपना मान बैठते ह...